भक्तों यशोदा मईया अपने पूर्व जन्म में धरा नाम की स्त्री और नंद द्रोण नाम के राजा थे जब इनको सत्य का ज्ञान हुआ तब ये दोनों अपने राज पाठ को छोड़कर विष्णु भगवान के तप हेतु वन में एक कुटिया बनाकर रहने लगे द्रोण और धरा दिन रात भगवान विष्णु का ध्यान करते और द्रोण को भिक्षा में जो कुछ मिलता दोनों उसी से अपना जीवन व्यतीत करते लेकिन धरा का एक पुण्य कर्म था वह कभी किसी साधु को अपनी दहलीज से भूखा नही जाने देती थी एक दिन भगवान उसकी परीक्षा हेतु साधु का रूप धारण कर आए और बोले देवी मुझे भूख लगी कृप्या मुझे भोजन कराए किन्तु इत्तफाक से उस दिन कुटिया में भोजन हेतु कुछ नही था लेकिन धरा ने साधु को कुछ समय इंतजार करने के लिए कहा , परन्तु साधु ने मना कर दिया ओर कहा कि मै कही और से भोजन कर लूंगा परन्तु धरा नही मानी और कहा कि मै अभी भोजन का इंतजाम करती हूं तनिक आप रुकिए, यह सुनकर साधु वही कुटिया में बैठ गया और धरा भोजन का इंतजाम हेतु पास के ही एक गांव में एक दुकानदार से आटा ओर गुड़ मांगने लगी जब बिना धन के आटा गुड़ देने से मना कर दिया तब धरा दुकानदार से कठोर विनती करने लगी और कहने लगी मेरे पति शाम को भिक्षा लेकर आएंगे तब तुम्हारा उधार चुका देगे ऐसे गिड़गिड़ाते देख दुकानदार की कुदृष्टि धरा के सुन्दर शरीर पड़ गयी और वह उसके स्तनों को देखकर मोहित होने लगा, दुकानदार कहने लगा कि मै तुम्हें आटा गुड़ तो दे दूँगा लेकिन उसके बदले में मुझे तुम्हारे सुन्दर स्तन चाहिए तब देवी धरा ने कहा ठीक है तुम आटा गुड़ पहले मेरी झोली में डालो तब मै तुम्हें अपने स्तन दे दूंगी अपनी गंदी इच्छा की पूर्ति के लिए वह दुकानदार जल्दी जल्दी देवी धरा की झोली में आटा गुड़ डाल देता है आटा गुड़ ढलते ही देवी धरा सामने रखे एक चाकू को उठाती है और अपने दोनों स्तनों को काटकर दुकानदार के आगे रख देती है और कहती है तुमको मेरे स्तन चाहिए थे तो ये लो मेरे दोनों स्तन और इतना कहकर वहाँ से खून में लथपथ हुई दौड़ पड़ती है और कुटिया में जाकर भोजन बनाकर साधु को भोजन करा देती है यह त्याग देखकर साधु विष्णु भगवान का रूप धारण कर लेते है और मूर्छित देवी धरा को पुनः स्वस्थ कर उन्हें वरदान देते है कि हे देवी धरा मै तुम्हारी भक्त्ति और त्याग से अति प्रसन्न हूँ मै तुम्हें वरदान देता हूँ कि द्वापर युग मे जब मै अवतार धारण करूंगा तब मैं जन्म तो देवकी के गर्भ से लूँगा परन्तु दूध का पान तुम्हारे स्तनों से ही करूंगा और तुम्हें मातृत्व का पूर्ण आनंद दूंगा.