श्री कृष्ण भक्तों माता यशोदा ने भगवान विष्णु की अत्यंत कठोर भक्त्ति की थी, जब माता यशोदा अपने पूर्व जन्म में धरा नाम की स्त्री थी तब भगवान विष्णु ने उनकी भक्त्ति से प्रसन्न होकर उन्हें चतुर्भुज रूप में दर्शन दिए और देवी धरा को मनवांछित वर मांगने को कहा तब देवी धरा ने श्री विष्णु भगवान के सम्मुख उनको ही पुत्र रूप में प्राप्त करने की इच्छा प्रकट की तब विष्णु भगवान ने उन्हें मनवांछित वर दे दिया और वर देते समय अपने मुख से तीन बार तथास्तु – तथास्तु – तथास्तु का उच्चरण कर दिया। श्री विष्णु भगवान ने देवी धरा को वर तो दे दिया किन्तु जब वर देने के बाद स्मरण किया तो देखा कि इस पूर्ण ब्रह्माण्ड में मेरे समान तो कोई है ही नही और अपने मुख से तीन बार निकले तथास्तु शब्द को सत्य करने के लिए विष्णु भगवान ने देवी धरा का तीन जन्मों तक पुत्र बनने का निश्चय कर लिया