Shri Krishna Logo
By Raman Kumar Ynr.
  • Home
  • All Gallery
  • Shri krishan Yashoda Maa Pictures
  • Shri krishan Baal Roop Pictures
  • Shri krishan Lila Pictures
  • Shri krishan Kishor Roop Pictures
  • Radha krishan Prem Lila Pictures
  • Shri krishan Nav Roop Pictures
  • Shri Krishan Blog
  • Privacy Policy
  • Contact Us1
  • Home
  • Shri krishan Gallery
    • All Gallery
    • Shri krishan Yashoda Maa Pictures
    • Shri krishan Baal Roop Pictures
    • Shri krishan Lila Pictures
    • Shri krishan Kishor roop Pictures
    • Radha krishan Prem Lila Pictures
    • Shri krishan Nav Roop Pictures
  • Shri Krishan Blog
  • Privacy Policy
  • Contact Us
Home Gallery Contact About

yashoda ma

Categories
  • Design
  • Illustration
  • Tutorials
  • News
Video Widget

Post navigation

Previous PostPrevious yashoda mata
Next PostNext shree radha krishna

Recent Posts

  • वामन अवतार की कथा ।
  • श्री कृष्ण भगवान ने वस्त्र हरण लीला क्यो की थी
  • श्री कृष्ण भगवान के बाल रूप के दर्शन करने के लिए शिव शंकर जी गोकुल आए
  • भगवान श्री कृष्ण ने कुबेर के पुत्रों का कैसे उद्धार किया
  • भगवान श्री कृष्ण द्वारा दामोदर लीला

Categories

  • Geeta-android
  • Latest Image 8 Front Website
  • Shri-Krishan-Blog

Get Our App

भगवान श्री कृष्ण की सुंदर वीडियो तस्वीरो भजनों वॉलपेपर रिंगटोन और गीता ज्ञान के लिए नीचे दिए गए लिंक से अभी हमारी ऐप इंस्टॉल करें

 Download on the App Store ▶ GET IT ON Google Play
Contact Us
Shri Krishna Logo

Raman Kumar s/o Rajbir Singh
Jagadhri, Yamunanagar, Haryana, India
Mob No:- 09466660442
Email :- ramankumar407@gmail.com
Thoughts
  • भगवान विष्णु के पाँचवें तथा त्रेतायुग के प्रथम अवतार वामन अवतार (Vamana Avatar) की कथा हिंदू धर्मग्रंथों और श्रीमद्भागवत पुराण (Srimad Bhagavatam) की प्रमुख पौराणिक कथाओं में से एक है। ​भगवान विष्णु के वामन अवतार की पौराणिक कथा (Vamana Avatar Story in Hindi) ​दैत्यराज बलि (महर्षि प्रह्लाद के पौत्र) ने अपनी कठोर तपस्या और पराक्रम से तीनों लोकों—पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल—पर अपना अधिकार कर लिया था। राजा बलि अत्यंत दानवीर और धर्मात्मा राजा था, किंतु असुरों के प्रभुत्व के कारण देवताओं के राजा इंद्र और अन्य देवगण स्वर्गलोक से बेदखल हो गए। ​देवताओं की माता अदिति ने अपने पुत्रों के कष्ट दूर करने के लिए भगवान श्री हरि विष्णु की कठिन तपस्या की। माता अदिति की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उनके गर्भ से वामन (बौने ब्राह्मण) के रूप में अवतार लिया। ​राजा बलि का अश्वमेध यज्ञ और वामन देव का आगमन ​राजा बलि अपनी सत्ता को स्थायी बनाने के लिए नर्मदा नदी के तट पर अत्यंत भव्य सौवें अश्वमेध यज्ञ (Ashwamedha Yajna) का आयोजन कर रहे थे। उसी समय भगवान वामन हाथ में छत्र, दंड और कमंडल लिए बाल ब्राह्मण के रूप में यज्ञशाला में पधारे। ​वामन देव के अलौकिक तेज को देखकर राजा बलि अत्यंत प्रभावित हुए और उनका आदर-सत्कार किया। बलि ने कहा, "हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! आप मेरी यज्ञशाला में आए हैं, आप जो भी चाहें मांग लीजिए—धन, स्वर्ण, राज्य या भूमि।" ​तीन पग भूमि का संकल्प ​भगवान वामन ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, "हे राजन! मुझे केवल अपने पैरों से नापी गई तीन पग (कदम) भूमि चाहिए।" ​दैत्यगुरु शुक्राचार्य अपनी योगविद्या से पहचान गए कि यह साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं भगवान विष्णु हैं। उन्होंने राजा बलि को संकल्प लेने से रोका, लेकिन राजा बलि ने अपने दिए वचन से पीछे हटने से इनकार कर दिया और तीन पग भूमि दान करने का संकल्प ले लिया। ​विराट 'त्रिविक्रम' रूप और तीन पग भूमि (Trivikrama Form) ​संकल्प पूरा होते ही भगवान वामन ने अपना आकार बढ़ाना शुरू किया और भगवान विष्णु का अत्यंत विशाल 'त्रिविक्रम' रूप धारण कर लिया: ​पहला पग: भगवान ने एक ही कदम में संपूर्ण पृथ्वी लोक को नाप लिया। ​दूसरा पग: दूसरे कदम में भगवान ने देवलोक और समस्त ब्रह्मांड को नाप लिया। ​अब तीसरा पग रखने के लिए पूरी सृष्टि में कोई स्थान शेष नहीं बचा। भगवान वामन ने राजा बलि से पूछा, "हे राजन! दो पग में सब कुछ समा गया, अब बताइए मैं अपना तीसरा पग कहाँ रखूँ?" ​राजा बलि का समर्पण और पाताल लोक का राज्य ​राजा बलि ने बिना किसी संकोच के अपना सिर झुका दिया और नम्रता से कहा, "हे प्रभु! मेरा वचन झूठा नहीं हो सकता। आप अपना तीसरा पग मेरे मस्तक पर रख दीजिए।" ​बलि की इस अद्वितीय भक्ति, वचनबद्धता और अहंकार-रहित समर्पण से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने अपना तीसरा पग राजा बलि के सिर पर रखा, जिससे राजा बलि पाताल लोक (Sutala) में चले गए। ​भगवान ने बलि की दानशीलता से प्रसन्न होकर उन्हें पाताल लोक का स्वामी बना दिया और अमर होने का वरदान दिया। साथ ही, देवताओं को उनका स्वर्गलोक पुनः प्राप्त हो गया। Vamana Avatar Story in Hindi, Bhagwan Vishnu Vamana Incarnation, Raja Bali and Vamana Dev, Three Steps Land Story, Ashwamedha Yajna Raja Bali, Lord Vishnu Fifth Avatar, Trivikrama Roop, Hindu Mythology Stories, Shukracharya and Raja Bali.
  • भगवान विष्णु के चौथे तथा अत्यंत उग्र अवतार नरसिंह अवतार (Narasimha Avatar) की कथा हिंदू धर्मग्रंथों, विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण की सर्वाधिक प्रसिद्ध पौराणिक कथाओं में से एक है। ​भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की पौराणिक कथा (Narasimha Avatar Story in Hindi) ​प्राचीन काल में हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप (Hiranyakashipu) नाम के दो महाशक्तिशाली दैत्य भाई थे। भगवान विष्णु के वराह अवतार द्वारा हिरण्याक्ष का वध किए जाने के बाद, हिरण्यकश्यप अत्यंत क्रोधित हो गया और उसने संपूर्ण संसार तथा देवताओं पर अधिकार जमाने का निश्चय किया। ​हिरण्यकश्यप की कठोर तपस्या और ब्रह्मा जी का वरदान ​हिरण्यकश्यप ने मंदराचल पर्वत पर जाकर ब्रह्मा जी की कठिन तपस्या की। ब्रह्मा जी के प्रकट होने पर उसने एक ऐसा अमरता का वरदान माँगा जिससे उसे मारना लगभग असंभव हो गया। उसने वरदान माँगा कि: ​वह न किसी मनुष्य (Human) द्वारा मारा जाए, न किसी पशु (Animal) द्वारा। ​उसकी मृत्यु न अस्त्र (Weapon) से हो, न शस्त्र से। ​वह न दिन (Day) में मरे, न रात (Night) में। ​वह न घर के अंदर मरे, न बाहर। ​वह न भूमि (Earth) पर मरे, न आकाश (Sky) में। ​यह वरदान प्राप्त कर हिरण्यकश्यप खुद को ही ईश्वर (भगवान) मानने लगा और अपने राज्य में भगवान विष्णु की पूजा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। ​भक्त प्रह्लाद की अनन्य विष्णु भक्ति (Bhakta Prahlad Story) ​हिरण्यकश्यप के घर में ही भगवान विष्णु के सबसे परम भक्त प्रह्लाद (Prahlad) का जन्म हुआ। बाल्यावस्था से ही प्रह्लाद दिन-रात "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" और श्री हरि के नाम का जाप करते रहते थे। ​हिरण्यकश्यप ने अपने ही पुत्र प्रह्लाद की भक्ति को भंग करने के लिए कई अत्याचार किए। उसे ऊंचे पहाड़ों से फेंका गया, विष दिया गया, और मत्त हाथियों से कुचलवाने का प्रयास किया गया। यहाँ तक कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका (Holika) प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठी (जिससे होली उत्सव का आरंभ हुआ), किंतु भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद हर बार सुरक्षित बच निकले। ​खंभे से भगवान नरसिंह का प्रकट होना ​क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को अपने दरबार में बुलाया और एक महल के खंभे (Pillar) की ओर इशारा करते हुए पूछा, "कहाँ है तेरा भगवान? क्या इस निर्जीव खंभे में भी तेरा विष्णु मौजूद है?" ​बालक प्रह्लाद ने परम विश्वास के साथ कहा, "हाँ, मेरे प्रभु कण-कण में व्याप्त हैं और इस खंभे में भी हैं।" ​जैसे ही हिरण्यकश्यप ने गदा से उस खंभे पर प्रहार किया, भयंकर गर्जना के साथ खंभा फट गया और उसमें से भगवान विष्णु का नरसिंह रूप (आधा शरीर मनुष्य का और आधा शेर का - Half Man, Half Lion) प्रकट हुआ। ​हिरण्यकश्यप का वध और धर्म की विजय ​भगवान नरसिंह ने ब्रह्मा जी के वरदान की हर शर्त का पालन करते हुए हिरण्यकश्यप का अंत किया: ​स्थान: भगवान उसे खींचकर महल की चौखट (Doorstep) पर ले गए (जो न घर के अंदर था, न बाहर)। ​समय: उन्होंने संध्या काल (Twilight) का समय चुना (जो न दिन था, न रात)। ​आसन: भगवान ने उसे अपनी जाँघों (Lap) पर लिटाया (जो न भूमि पर था, न आकाश में)। ​अस्त्र-शस्त्र: भगवान ने अपने तीखे नखों (Sharp Nails) से उसकी छाती चीर दी (जो न अस्त्र थे, न शस्त्र)। ​स्वरूप: भगवान स्वयं नरसिंह रूप थे (जो न पूर्ण मनुष्य थे, न पूर्ण पशु)। ​इस प्रकार भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध कर भक्त प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की और संसार में पुन: धर्म की स्थापना की। भगवान का उग्र रूप केवल भक्त प्रह्लाद के सौम्य मंत्रों और प्रार्थना से ही शांत हुआ। Narasimha Avatar Story in Hindi, Bhagwan Vishnu Fourth Avatar, Bhakta Prahlad and Hiranyakashipu, Narasimha Jayanti Katha, Holika Dahan Story, Lord Vishnu Incarnations, Half Man Half Lion Avatar, Vedic Mythology Stories, Vaishnavism Fasting and Rituals.
Latest Video
Copyright 2026. All rights reserved.
Home   |   Gallery   |   Privacy policy   |   Contact
Back to Top
Verified by MonsterInsights