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Raman Kumar s/o Rajbir Singh
Jagadhri, Yamunanagar, Haryana, India
Mob No:- 09466660442
Email :- ramankumar407@gmail.com
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  • श्री कृष्ण की गोवर्धन लीला: जब भगवान ने उंगली पर उठाया पहाड़ और तोड़ा इंद्र का अहंकार ​भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं (Shri Krishna Leela) न केवल मन को शांति देती हैं, बल्कि जीवन का गूढ़ ज्ञान भी सिखाती हैं। इनमें से सबसे अद्भुत है 'गोवर्धन पर्वत की लीला', जिसे हर साल गोवर्धन पूजा के रूप में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। ​आइए जानते हैं इस पावन कथा के पीछे का रहस्य और इससे मिलने वाली सीख। ​1. इंद्र का अहंकार और ब्रजवासियों की परंपरा ​कथा के अनुसार, द्वापर युग में ब्रजवासी हर साल इंद्र देव की पूजा करते थे ताकि अच्छी वर्षा हो और फसलें लहलहाएं। नन्हे कृष्ण ने देखा कि लोग इंद्र की पूजा भय के कारण कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि वर्षा करना इंद्र का कर्तव्य है, लेकिन हमें उस प्रकृति और गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, जो हमारी गायों को चारा और हमें जीवन देता है। ​2. पहली गोवर्धन पूजा की शुरुआत ​कृष्ण की बात मानकर नंद बाबा और सभी ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा बंद कर दी और गोवर्धन पर्वत की भव्य पूजा शुरू की। उन्होंने पर्वत को 56 प्रकार के भोग लगाए, जिसे आज हम 'छप्पन भोग' कहते हैं। ​3. इंद्र का क्रोध और मूसलाधार वर्षा ​जब इंद्र देव को पता चला कि उनकी पूजा बंद हो गई है, तो उन्होंने इसे अपना अपमान समझा। अहंकार में आकर उन्होंने ब्रज पर प्रलयकारी वर्षा और तूफान का आदेश दे दिया। भारी वर्षा से पूरा ब्रज डूबने लगा और लोग त्राहि-त्राहि करने लगे। ​4. कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत (The Divine Act) ​अपने भक्तों की रक्षा के लिए, बाल कृष्ण ने मुस्कुराते हुए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली (कनिष्ठा) पर उठा लिया। ​सात दिन और सात रात: कृष्ण पर्वत को छतरी की तरह थामे रहे। ​शरण में ब्रजवासी: सभी ब्रजवासी, अपनी गायों और परिवार के साथ पर्वत के नीचे सुरक्षित आ गए। ​इंद्र का आत्मसमर्पण: अंततः इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने वर्षा रोकी और कृष्ण के चरणों में गिरकर क्षमा मांगी। ​इस लीला से मिलने वाली 3 बड़ी सीख (Life Lessons) ​प्रकृति का सम्मान: यह लीला सिखाती है कि हमें प्रकृति (पेड़, पहाड़, नदियाँ) की रक्षा करनी चाहिए क्योंकि वही हमारा भरण-पोषण करती है। ​अहंकार का विनाश: चाहे कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो (जैसे इंद्र), अहंकार का अंत निश्चित है। ​ईश्वर पर अटूट विश्वास: यदि हम परमात्मा की शरण में हैं, तो बड़े से बड़ा संकट भी एक पहाड़ की तरह हल्का महसूस होता है। ​निष्कर्ष: श्री कृष्ण की हर लीला में एक संदेश छुपा है। गोवर्धन लीला हमें एकता और प्रकृति प्रेम का संदेश देती है। आज भी मथुरा-वृंदावन में गोवर्धन परिक्रमा को अत्यंत फलदायी माना जाता है। ​राधे-राधे! ​क्या आप इस लीला से जुड़ी कुछ और रोचक बातें या गोवर्धन पूजा की विधि जानना चाहते हैं? मैं आपकी सहायता कर सकता हूँ।
  • कालिया नाग मर्दन: जब श्री कृष्ण ने यमुना को विषमुक्त किया और तोड़ा कालिया का घमंड ​भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं (Shri Krishna Leela) न केवल मनमोहक हैं, बल्कि वे हमें बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश भी देती हैं। द्वापर युग की सबसे प्रसिद्ध कथाओं में से एक है 'कालिया नाग मर्दन'। यह कथा हमें सिखाती है कि कैसे अहंकार का अंत होता है और पर्यावरण की रक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। ​1. यमुना का काला पानी और कालिया नाग का खौफ ​वृंदावन के पास बहने वाली पावन यमुना नदी का एक हिस्सा कालिया नाग के कारण अत्यंत विषैला हो गया था। कालिया नाग अपने परिवार के साथ यमुना के 'रमणक द्वीप' के एक कुंड में रहता था। उसका विष इतना खतरनाक था कि: ​नदी का पानी खौलने लगा था। ​किनारे के पेड़-पौधे सूख गए थे। ​ऊपर से उड़ने वाले पक्षी भी विषैली गैस से मरकर पानी में गिर जाते थे। ​2. यमुना में गेंद और कृष्ण की साहसी छलांग ​एक दिन बाल कृष्ण अपने सखाओं के साथ गेंद (कंदुक) खेल रहे थे। अचानक गेंद यमुना के उस विषैले कुंड में जा गिरी। अपने मित्रों को उदास देखकर और यमुना को शुद्ध करने के संकल्प के साथ, नन्हे कृष्ण ने कदम के पेड़ से सीधे विषैले जल में छलांग लगा दी। ​3. जल के भीतर महायुद्ध (The Divine Battle) ​जैसे ही कृष्ण जल के भीतर पहुंचे, कालिया नाग ने उन पर आक्रमण कर दिया। उसने अपने विशाल शरीर से कृष्ण को जकड़ लिया। ब्रजवासी किनारे पर खड़े होकर डर के मारे रोने लगे। लेकिन तभी: ​कृष्ण का विस्तार: प्रभु ने अपना शरीर इतना विशाल करना शुरू किया कि कालिया की पकड़ ढीली पड़ गई। ​दिव्य नृत्य: श्री कृष्ण कूदकर कालिया के सौ फनों पर सवार हो गए और दिव्य नृत्य करने लगे। ​फनों का मर्दन: कृष्ण के चरणों के प्रहार से कालिया नाग का सारा अहंकार और विष निकल गया। वह लहूलुहान होकर हार मान गया। ​4. नाग-पत्नियों की प्रार्थना और क्षमादान ​जब कालिया नाग मृत्यु के निकट था, तब उसकी पत्नियों (नागवधुओं) ने हाथ जोड़कर श्री कृष्ण से अपने पति के प्राणों की भीख मांगी। दयालु कृष्ण ने कालिया को जीवनदान दिया लेकिन एक शर्त रखी: ​"हे कालिया! अब तुम इस पावन नदी को छोड़कर समुद्र में चले जाओ। तुम्हारे सिर पर मेरे चरणों के निशान हैं, इसलिए अब गरुड़ भी तुम्हारा शिकार नहीं करेगा।" ​इस लीला से मिलने वाली 3 बड़ी शिक्षाएं (Life Lessons) ​पर्यावरण की सुरक्षा: यह लीला आज के समय में जल प्रदूषण को रोकने का संदेश देती है। नदियों को स्वच्छ रखना हमारा आध्यात्मिक कर्तव्य है। ​अहंकार का नाश: व्यक्ति कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, यदि वह दूसरों को कष्ट देता है, तो उसका पतन निश्चित है। ​अभय और साहस: संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि मन में विश्वास है, तो आप उस पर विजय पा सकते हैं। ​निष्कर्ष: श्री कृष्ण की हर लीला हमें धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कालिया नाग मर्दन की यह कथा हमें बुराई को समाप्त करने के बजाय उसे नियंत्रित कर सही दिशा में मोड़ने की कला सिखाती है। ​राधे-राधे!
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